उस पार भी कुछ है -आओ दिखा दूं …

उस पार भी कुछ है … आओ दिखा दूं …

बहुत तरह की गर्द है , जिससे इंसान ने समझौता कर लिया है ! वो कहता है चलना मुश्किल हो गया है , दलदल मे चलना मुश्किल ही होता है , इसमे कोई चोकने की बात नही ! दलदल मे पनप रहे कई कीटाणु अंदर चले गये हैं ! जीतने कदम आगे बढ़ते है उतना ही अंदर की ओर धस्ता जा रहा है इंसान…

कोई उसे हाथ पकड़ इस दलदल मे नही लाया , जाने कौन सा छलावा दिख रहा था उसे दूर बैठे बैठे ,खुद ही खिचा चला आया ! दलदल मे रहता है , घूमता है , बोलता है सोता जागता है , अगर कोई पूछ ले तो साफ इनकार कर देता है कहता है क्या सुंदर बाग है, जैसा सुख यहा मिल रहा है ऐसा कहीं और नही ! कई बार वो साफ रस्तो पर चलते राहगीरो को भी दलदल मे खींच लेता है , लोभ के मारे धँस जाते है उसी के साथ ….

जानता भी है की कुछ भी उठा कर चलना मुश्किल है , फिर भी सर पर ,अपनी बगलो मे और हाथो मे गठरियाँ उठा रखी है , रास्ते मे नया सामान खरीदता रहता है , जाने क्यूँ महरूम रहना चाहता है हल्के-हल्के चलने को … यही सामान उसका ध्यान बँटता रहता है हरपल , अपनी सुध भूल चुका है , जाने क्या करेगा उन कपड़ो का जो पुराने हो चुके , जो अब पहने भी नही जा सकते , पर उन्हे ढो रहा है खुश हो जाता है उन्हे देख कभी कभी ….

दलदल से निकालने के लिए उसे त्याग देना होगा सब कुछ… चाहे एक साथ , चाहे तो एक एक करके … हल्के करना होगा तब तक जब तक रूई सा ना हो जाए … जिस दिन रूई बन जाए , मीठी मंद हवा उड़ा ले जाएगी दलदल के पार … सफ़र आसान होगा , बस खुश्बू होगी …. बस तैरना होगा सुहानी हवाओं मे ….

जीवन दलदल , कीटाणु ,बोझ और बदबू से परे है … बहुत परे …. आओ दिखा दूं ..ले चलूं ….

@राहुल योगी देवेश्वर

About shantisekranti

Writer , Poet , Thinker and Researcher on Life . I say what I feel , I do not feel the way you feels. Nature never creates replica of BEINGS. We all are born to fulfill certain purpose of Nature, their are many pass by sleeping yet living, some hunts the purpose and few unwanted and unacceptable BINGOSss! The major portion of my expressions are through Poem and Articles ..www.Fitkari.in ( Alum ) is the place where me and my poetry coincides. I am not in this world to bring any revolution. I am here as nature decided me to be here ...like right now I am exactly and full fledged here ( while typing ) ... :)
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