अठवा अनुच्छेद – शांति से क्रांति

अठवा अनुच्छेद – शांति से क्रांति

ईश्वर से मिलने की चाह का मूल कारण profit without investment होता है , profit का रूप कोई भी हो सकता है ! भक्ति , मनोकामना , जन कल्याण परंतु हर रूप के गर्भ मे फ़ायदा छुपा हुआ है , कोई बुराई नही है उसमे , पर गर्भ को जान लेने मे भी कोई बुराई नही !

किसी साधु से मुलाकात हुई , उसने कहा बोलो क्या चहा है , रास्ता मैं बतलाता हूँ ! अब पैसा छप्पर फाड़ कर मिल रहा हो , तो बटोर लेने मे ही समझदारी है , बस वही हुआ मेरे साथ , राज़ मालूम हुआ की यह मंत्र है , इसका जप करते रहो 12 वर्ष मे लक्ष्मी सिद्ध हो जाएगी फिर जितना मूह फड़ोगे उतना मिल जाएगा ! हर्ष हुआ पर 12 वर्ष सुन कर निराशा भी हुई , आज़माने मे कुछ जा भी नही रहा था , मंत्र वैसे भी मन मे पढ़ना था , अगर बेवकूफ़ बनता तो ब्रेकिंग न्यूज़ भी नही बन रही थी तो बस काम शुरू ! हाँ , साधु को निराशा इस बात की हुई की मेरे जैसा जवान ,सूझवान मानव जो उनका विचार था , परम सुख की कामना कहता ! मुझे तो परम सुख माया मे ही दिखा सो माँग लिया !

गुनगुनाना चलता रहा , जीवन भी बहता रहा ! जब भी मुलाकात होती , तो अपनी फकीरी का status quo बता देता ! कभी कभी अपने आप को साधक समझने मे बड़ा मज़ा भी आता !

साधु शब्द पाली से आया है , जिसका अर्थ सत्य है ! हज़ारो वर्ष पूर्व लोग रोज़मर्रा के जीवन मे अगर कोई सत्य बात कहता तो साधु साधु , कहते थे ! फिर जो लोग सत्य के राह पकड़ लेते उनको साधु कहने लगे ! अंत मे साधु रह गया सत्य गायब हो गया !

मंत्र अंतर्मन को एकाग्र करने के लिए लिखे गये ! हर मंत्र का अर्थ है , साधु काल मे ,  patient अर्थात मरीज़ , मानसिक , शारीरिक या जिज्ञासा से भरा , अगर किसी रोग का शिकार होता तो उसे मंत्र दिया जाता ! कहा जाता जाओ इसको पढ़ते रहो , जिस दिन अर्थ जान जाओ गे तुम्हारा कल्याण हो जाएगा ! अर्थात , उस मंत्र के शब्दार्थ मे उसकी बीमारी का इलाज छुपा होता, पढ़ते पढ़ते एक दिन वो जान जाता की मैं जो ग़लती कर रहा हूँ , उसे ठीक कैसा करना है और उसे वो ग़लती खुद अपने प्रयास से ठीक करनी पड़ती !

एक मूह से दूसरे मूह , दूसरे मूह से तीसरे मूह बात जब निकल जाती है , तो कोई हसीन गुल खिलाती  है ! बस वैसा ही कुछ हमारे मंत्रो के साथ हो रहा है ! दो चार तो आप को भी याद होंगे !

मंत्र एक साधन है जिस को जब आप पढ़ते है , लगातार जप करते रहते हैं , तो किसी फालतू काम मे टाइम वेस्ट नही होता ! बार बार जपने को बस इसी लिए कहा जाता है , क्यूकी बार बार कहने से , बताने वाला की मंशा होती है , भाई एक बार तो ध्यान से अर्थ समझ , और उस अर्थ को जीवन मे उतार , फिर देख क्रांति ही क्रांति !

ध्यान भी एक साधन है , अंतर्मन को समझने के लिए ! The most effective tool , सारा दिन ध्यान ( Meditation )करने से आप कोई ईश्वर नही बन जाने वाले ! हाँ , जिस जिस किताब मे आप ने ईश्वर के बारे मे अच्छी अच्छी बाते पढ़ी है , उन को अपने जीवन मे उतार सकने की शक्ति और समझ ज़रूर जुटा सकते हैं ! परंतु फिर जीवन मे उतारने का प्रयास खुद को ही करना पड़ेगा , Automatic नही होगा ! Automatic तो शब्द भी बाज़ार मे फ्री मे नही मिलता , उसके लिए भी dictionery ख़रीदनी पड़ती है !

ज्ञान , ब्रह्म ज्ञान , सच मे उपलब्ध है , फिर वही प्रयास की ज़रूरत है ! FREE FREE FREE Tag के साथ तो सिर्फ़ धोखा मिलता है , फिर वहाँ भी Donation देनी पड़ती है , पर मन को सब पुचकार लेते हैं की शायद कुछ भला हो जाए !

ध्यान वो दशा है , जहाँ आप अपने विचारो पर विजय पा लेते है ! एक survey बताता है की हम एक दिन मे लगभग 60 हज़ार बार , या 60 हज़ार बाते सोचते हैं ! मन बड़ा ही शैतान है , एक जगह पर रुकता नही ! विचारो मे कोई contiunity भी नही ! सोच सोच कर दिमाग़ पर इतना बोझ डाल देते हैं की सिरदर्द की गोली हमेशा जेब मे रहती है !  जेब गर्म हो तो रोज़ डॉक्टर की किस्मत चमका कर भी आते हैं ! फिर आम dialouge सुनने को मिल जाता है की ” life is full of tensions yaar ” , “मैं बहुत tension मे हूँ मुझे अकेला छोड़ दो ” , ” I need some Space” .

कोई पहाड़ा नही पढ़ना , किसी जंगल मे नही जाना , कोई पर्वत नही चढ़ना , कोई अगरबत्ती नही जलानी ! बस उस state मे पहुँचना है , जहाँ आप इन 60 हज़ार विचारो को एक एक कर अपने दिमाग़ के inbox से delete करते जाए ! धीरे धीरे होगा , पर ज़रूर होगा , यह पक्का है ! अब बचपन मे नानी के घर के पास एक कुत्ता था जिस के बच्चे ने बगल वाली आंटी के घर मे potty कर दी थी , यह भी लोगो के concious mind मे रहता है ! मुझे कोई बता दे की इस विचार से आप के growth मे  कहाँ मदद हो रही है ! delete मरो ना, recycle bin से भी delete  कर दो  ! कैसे होगा , ध्यान से , meditation से , भूल जाने से नही , भूलने से तो फिर किसी दिन यू ही याद आ जाएगा , और आप का जो समय और शक्ति किसी और काम मे लगनी चाहये उसको खा जाएगा ! विचार करे !

जैसे जैसे दिमाग़ मे deletion होता जाए , उसको अच्छी अच्छी मौलिक विचारो से भरते जाइए ! void या null की state भी अच्छी नही , उसे संभालना थोड़ा मुश्किल होता है ! moral values से भरते जाइए , कोई मुश्किल नही होगी !

अब meditation के कई चक्कर हैं , आप किसी चक्कर के चक्कर मे ना पड़े तो आप का चक्कर बाड़िया रहेगा ! एक बार शुरू हो गये , कुछ समझ बड गई फिर सारे चक्कर भी समझ आ जाएँगे !

अब ध्यान के साथ मंत्र पड़ेंगे तो ध्यान तो मंत्र मे रहेगा , फिर ध्यान तो पूर्ण हुआ नही , मंत्र का चक्कर चलता रहा ! ध्यान का बेसिक अर्थ मन को एक जगह एकाग्र करना है , जब कोई विचार ना हो , ऐसी स्थिति मे आप अपने अंतर्मन को महसूस कर पाएगे ! मन मे कोई सवाल आए गा , तो उसका जवाब समझ आ जाएगा, या मिल जाएगा ! कुछ देर बाद उसी एक सवाल के कई जवाब , कई विस्तार (dimensions ) मिलेंगे ! वही स्थिति ब्रह्म ज्ञान है ! तो अगर समझ बढ़ानी है तो शुरू करो !

बात तो आप लोगो के समक्ष रखनी थी , शायद साफ साफ बताया है या कोशिश की है ! हाँ मान लेने पर क्रांति ज़रूर होगी , पर एक एक कदम शांति का है ! फूट फूट कर कदम रखना होगा , चले आओ फिर …

निमंत्रण है शांति से क्रांति के पथ पर …

@राहुल योगी देवेश्वर

About shantisekranti

Writer , Poet , Thinker and Researcher on Life . I say what I feel , I do not feel the way you feels. Nature never creates replica of BEINGS. We all are born to fulfill certain purpose of Nature, their are many pass by sleeping yet living, some hunts the purpose and few unwanted and unacceptable BINGOSss! The major portion of my expressions are through Poem and Articles ..www.Fitkari.in ( Alum ) is the place where me and my poetry coincides. I am not in this world to bring any revolution. I am here as nature decided me to be here ...like right now I am exactly and full fledged here ( while typing ) ... :)
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