संरचनात्मक शांति से क्रांति

संरचनात्मक शांति से क्रांति

मकसद के दो भाग ,
पहले क्रमिक विकास ,
दूजा क्रांति का आगाज़ ..

पहले अपनी समझ बड़ाओ ,
समझ मे पूरा रच मिच जाओ ,
अपने ध्येय पर आँख जमाओ ,
आगे आगे बढ़ते जाओ…

पाना मकसद नही खेल आसान ,
इसमे युक्ति और गठन महान,
थोड़ा इतिहास खोल कर देखो ,
उसके पन्ने फ़ॉल कर देखो …

अब मकसद पर कुछ लेख लिखो,
पूरा क्रांति का उल्लेख लिखो ,
फिर लोगो से बात करो ,
जो बुझे ,समझे उसको साथ धरो..

अपनी शक्ति भूलो मत ,
नेतृत्व करो प्रथम सख़्त..

सर्जनात्मकता के पंख फलाओ,,
खोलो रास्ता बंद हुआ …

इस वक़्त बस करो प्रचार ,
अवैतनिक शक्ति का करो संचार..

स्वयंसेवक की शक्ति बड़ाओ,
सबमे थोड़ी स्वायत्तता जगाओ ..

संचालन नियंत्रण पर रखो ध्यान,
खोल दो सारे मुद्दो की ख़ान …

ताल-मेल को बना के रखना,
ग़लती पर कभी ना झुकना…

जितना नेतृत्व की कमी दिखेगी,
उतना शक्ति और बड़ेगी …

सूझवान को आगे करना,
बोलो करो जगह-जगह पे धरना ..

हर सोते को जागता करदो,
जीवन मे बदलाव की नीव धरदो ..

पूर्वानुमान करते जाना ,
किसी बाधा से ना घबराना..

हर सुलझन मे मिलेगी उलझन,
आगे बडकर हल बतलाना…

आगे आगे बडते जाना,
किसी नशे हो मत अपनाना,
मकसद पाना !
मकसद पाना !!

@राहुल देवेश्वर

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