आमोद-प्रमोद

आमोद-प्रमोद

भूमिका
चिंतको मे आमोद प्रमोद भी चिंतन से भरा होता है , हँसी एक रूप मे दिखे , पर अंतर्मन मे मायने अलग अलग होते हैं ! गहराई का कोई तल या ताल नही होती , वो डूबने वाले पर निर्भर करता है .की वो कितना डूबना चाहता है ! किसी का मज़ाक उड़ाना , या किसी  की निंदा करना इस पटल का उद्देश्य कदापि नही है! आमोद-प्रमोद  के पटल पर कुछ ऐसी घटनाए डालता रहूँगा , जिनकी गहराई बहुरूपता से भरी हो !

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चिंतक :- ” जाओ उस इंसान से मिल लो ,वो शत प्रतिशत तुम्हारा काम करवा देगा, उस व्यक़्ति की गारन्टी मैं लेता हूँ ”

साधक :- ” जाओ! जाओ!! , बेपरवहा जाओ !! ”

ध्यानी :- ” शमा के साथ यह बता दे कृपया ! की आप की गारन्टी कौन लेगा प्रभु!! ?”

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प्रेमिका :- क्या आप मुझे नही समझते ? जाओ मैं आप से बात नही करूगी !

प्रेमी :- सत्य की मैं आपको नही समझता , आपको समझना मेरा उदेश्य भी नही , मेरी कोई उदेश्य है ही नही , साफ साफ बोलो क्या इच्छा है प्रिया !

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क्या आपको शत प्रतिशत यकीन है की जो ” मैं” आप को कल मिला था , वही “मैं” आज हूँ !

अगर मेरे हर पल बदलने से मेरा नाम भी बदल जाता तो जीवन भर मे मेरे अनंत नाम होते ! अच्छा “मैं” अब अपना क्या नाम रखूं? बोलो !! , और अब …..

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प्रेमिका :  मुझ से कितना प्यार करते हैं आप ?

प्रेमी : बिल्कुल नही ! खुद से अनंत प्रेम है , तुम्हारे लिए इतना ही काफ़ी है !

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पहला : काल आ गया है , भाई काल !! अघोर कलियुग!

दूसरा : काल तो सदा से था

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धरती गोल है !
धरती अति सुंदर है !
धरती पर हा हा कार मचा है !

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@राहुलयोगी देवेश्वर

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